Thursday, 26 January 2012

इस्लाम की अमोघता -क्या कुरान में गलतियाँ हैं या उसमें बदलाव हुये हैं?


सर,
 समूची इस्लामी दुनिया यह विश्वास करती है कि क़ुरान अमोघ है, इसमें ग़लतियाँ नहीं हो सकतीं। उनके दिमाग में यह विश्वास इतनी गहराई तक जमा हुआ है कि जब मेरे एक मुस्लिम मित्र ने मुझे इस्लाम से परिचत कराया तो उसने इसे क़ुरान के ईश्वरीय उद्गम के प्रमाण की तरह पेश किया। उसने तर्ह रखा कि चूँकि दूसरी पवित्र किताबों की तरह क़ुरान में बदलाव नहीं हुये हैं, यह ईश्वरीय है।
कृपया इस का उत्तर दें कि क़ुरान में बदलाव हुये हैं या नहीं (इसके कारण वह भ्रष्ट हुई है क्या?) 
कुरान में गलतियाँ हैं या नहीं और उसमें बदलाव हुये हैं या नहीं, ये दो अलग अलग विषय हैं। 
पहले प्रश्न का जवाब है कि कुरान अमोघ नहीं है। इसमें हजारों गलतियाँ, बेहूदी बातें, विरोधाभास, त्रुटियाँ और मूर्खता की हद तक की बातें भरी हुई हैं। यह तर्क, इतिहास, विज्ञान, बाइबिल और यहाँ तक कि खुद से भी विरोध रखती है और खरी नहीं उतरती। इसमें ग्रामर की ऐसी गलतियाँ भी हैं जो यह दर्शाती हैं कि इसका लेखक असिक्षित था। आप को इस जैसी बेहूदी किताब शायद ही मिले। यह इतने घटिया तरीके से लिखी गई है कि मैं इसे साहित्य नहीं कह सकता। 
दूसरे सवाल का जवाब हम नहीं जानते। जो कुरान आज हमारे सामने है वह ओथमान के द्वारा संकलित की गई। उसने कुरान के सारे दूसरे वर्जन जला दिये ताकि मुसलमानों के बीच कोई असहमति न हो। यह स्पष्ट है कि दूसरे तमाम प्रकार उसके द्वारा चुनी गई किताब से अलग रहे होंगे वरना वह उन्हें नहीं जलाता। उसने यह कैसे तय किया कि उसका वर्जन ही सही है और बाकी ग़लत? उसके पास इसकी पुख्ता जानकारी का कोई उपाय नहीं था। इसकी सम्भावना अधिक ही है कि उसके द्वारा चुना गया वर्जन सही नहीं था। बहरहाल, चूँकि बाकी सारे वर्जन नष्ट किये जा चुके हैं, यह कह पाना नामुमकिन है कि आज जो हमारे पास है वही सही किताब है।   
 जरा नज़र घुमाइये कि हदीसों का क्या हुआ। भिन्न भिन्न लोगों ने एक ही कहानी को अलग अलग तरीकों से बताया। वे जरूरी बातों के मामले में भी अलग हैं। कुरान की आयतों के साथ भी यही हुआ होगा, शायद उस सीमा तक नहीं, क्यों कि उन्हें जबानी याद किया गया था।   
तो भी, थोड़े तार्किक ढंग से सोचने पर हम यह मान सकते हैं कि चूँकि भ्रम को मिटाने के लिये ओथमान को सारे दूसरे वर्जन जलाने पड़े थे, यह किताब भी बदली गई होगी। यह भी सम्भव है कि वर्तमान कुरान की बहुत सी आयतें वह नहीं हैं जिन्हें मुहम्मद ने कहा था। मूल आयतें वह रही होंगी जिन्हें जला दिया गया। बहुत सी आयतें हमेशा के लिये खो गईं। यह भी सम्भव है कि कुरान में कुछ ऐसी आयतें जोड़ी गई हैं जिन्हें वास्तव में मुहम्मद ने नहीं कहा था।
_____________________________________
ओरिजनल : http://alisina.org/the-infalibility-of-the-quran/